Jülich टीम ने 99.98% से अधिक फिडेलिटी के साथ 6.8 नैनोसेकंड के ट्रांसमॉन गेट चलाए
Jülich, Aachen और Cologne के शोधकर्ताओं ने Nature Communications में मल्टी-फ़ोटॉन लीकेज दबाने वाली पल्स विधि से अति-तेज़ एकल-क्यूबिट गेटों की जानकारी दी।
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Forschungszentrum Jülich के भौतिकविदों ने RWTH Aachen University और University of Cologne के साथ मिलकर एक अतिचालक क्यूबिट पर एकल-क्यूबिट ऑपरेशन 6.8 नैनोसेकंड में, 99.98% से अधिक सटीकता के साथ किए। Nature Communications में Ultrafast single-qubit gates through multi-photon transition removal शीर्षक से प्रकाशित यह परिणाम माइक्रोवेव नियंत्रण पल्स को आकार देने के एक नए तरीके पर आधारित है। Jülich की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अतिचालक मशीनों में ऐसे ऑपरेशन आम तौर पर कई दसियों नैनोसेकंड लेते हैं।
क्या घोषणा हुई
Jülich की Helmholtz Nano Facility में बने एक ट्रांसमॉन क्यूबिट पर दो बुनियादी गेट चलाए गए, हर एक 6.8 नैनोसेकंड की माइक्रोवेव पल्स से संचालित। संस्थान के अनुसार मापी गई फिडेलिटी 99.981% और 99.989% रही, और क्यूबिट के ऊँचे ऊर्जा स्तर में लीक होने की संभावना प्रति ऑपरेशन 0.002% से कम रही। Quantum Computing Report इन गेटों को X और X/2 बताता है और कहता है कि फिडेलिटी इंटरलीव्ड रैंडमाइज़्ड बेंचमार्किंग से मापी गई। यह काम Jülich द्वारा समन्वित जर्मन राष्ट्रीय संघ QSOLID के तहत हुआ।
तकनीकी विवरण
गति इसलिए मायने रखती है क्योंकि क्यूबिट अपनी अवस्था थोड़े समय तक ही बनाए रखते हैं: तेज़ गेट उस समय-खिड़की में त्रुटि-सुधार चक्रों सहित अधिक ऑपरेशन समाने देते हैं। लेकिन छोटी पल्स को अधिक शक्तिशाली होना पड़ता है, और ट्रांसमॉन में गणना के लिए प्रयुक्त दो स्तरों के ऊपर भी ऊर्जा स्तर होते हैं। Jülich टीम ने पाया कि तेज़ और शक्तिशाली पल्स क्यूबिट को केवल एक मंज़िल नहीं, बल्कि मल्टी-फ़ोटॉन संक्रमणों के ज़रिए दो या तीन मंज़िल ऊपर धकेल सकती हैं—प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह प्रभाव पहले अनदेखा रहा था और कई गणना चरणों तक बना रहकर त्रुटि सुधार में बाधा डाल सकता है।
नई विधि R2D, दस साल से अधिक समय से प्रयुक्त मानक पल्स-सुधार तकनीक DRAG पर आधारित है। यह पल्स को इस तरह आकार देती है कि अवांछित संक्रमण पैदा करने वाले आवृत्ति घटक छन जाएँ, जबकि अभीष्ट ऑपरेशन फिर भी हो। शोधकर्ताओं के अनुसार मानक विधि की तुलना में R2D मल्टी-फ़ोटॉन संक्रमण की संभावना 20 गुना से अधिक घटाती है। QCR के अनुसार शेष गेट त्रुटि नियंत्रण त्रुटियों से नहीं, बल्कि डीकोहेरेंस से सीमित है।
प्रायोगिक काम का नेतृत्व Peter Grünberg Institute के PGI-13 में Yuan Gao और Rami Barends ने किया, और सिद्धांत PGI-8 के José da Costa Jesus, Francisco Cárdenas-López और Felix Motzoi ने तैयार किया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
सटीकता खोए बिना तेज़ गेट, क्यूबिट के डीकोहेर होने से पहले त्रुटि-सुधार योजनाओं को अधिक गुंजाइश देते हैं, और लीकेज को दबाना ख़ास तौर पर मूल्यवान है क्योंकि लीक हुई अवस्थाओं को मानक कोड के लिए संभालना कठिन होता है।
आगे क्या देखें
शोधकर्ता ज़ोर देते हैं कि अब तक यह तकनीक केवल एक अलग-थलग क्यूबिट पर परखी गई है। आगे के प्रयोगों को दिखाना होगा कि क्या यह बड़े प्रोसेसरों में, जहाँ क्रॉसटॉक और आवृत्ति भीड़ समस्या बनते हैं, और दो-क्यूबिट ऑपरेशनों में भी कारगर रहती है।
स्रोत
इस पेज पर दी गई जानकारी नीचे दिए गए स्रोतों से ली गई है, जिन्हें DesignQuantum ने संकलित किया है।
- Ultrafast single-qubit gates through multi-photon transition removal (Nature Communications) doi.org
- Fast but accurate – a new speed record for quantum gates (Forschungszentrum Jülich via EurekAlert!) eurekalert.org
- Forschungszentrum Jülich Demonstrates 6.8-Nanosecond Single-Qubit Gates with > 99.98% Fidelity (Quantum Computing Report) quantumcomputingreport.com
- Forschungszentrum Jülich fz-juelich.de